
दिनांक: 03 अक्टूबर 2026 | देहरादून
युवा ऊर्जा, उत्कृष्ट कार्यशैली और प्रेरणादायी व्यक्तित्व के धनी हैं रेशम फेडरेशन के महाप्रबंधक मातवर सिंह कंडारी
नशामुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान के अंतर्गत वैली चैंपियनशिप का भव्य समापन; खेलों के माध्यम से युवाओं को दिया नशे से दूर रहने का संदेश
“युवा वह नहीं जो केवल उम्र से जवान हो, युवा वह है जिसके विचारों में नवीनता, कार्यों में प्रतिबद्धता और व्यक्तित्व में समाज को दिशा देने का सामर्थ्य हो।”

उत्तराखंड रेशम कोऑपरेटिव फेडरेशन के महाप्रबंधक मातवर सिंह कंडारी ऐसे ही ऊर्जावान, दूरदर्शी और बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं, जिनकी कार्यशैली में युवाओं जैसा उत्साह, जिम्मेदार अधिकारी जैसी गंभीरता और समाज के प्रति सकारात्मक सोच का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। उनका व्यक्तित्व इस बात का उदाहरण है कि पद की गरिमा तभी सार्थक होती है, जब उसके साथ कार्य के प्रति समर्पण, व्यवहार में सहजता और समाज के भविष्य के प्रति संवेदनशीलता भी जुड़ी हो।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ के अंतर्गत न्यू क्रिएशन इंटरनेशनल एवं इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर ट्रेनिंग एंड रिसर्च (IATR) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सप्ताहव्यापी वैली चैंपियनशिप के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उनकी उपस्थिति ने युवाओं को खेल, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
महाप्रबंधक कंडारी ने विजेता खिलाड़ियों को ट्रॉफी एवं धनराशि प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज की Gen Z पीढ़ी को अपनी ऊर्जा नशे से दूर रहकर खेल, शिक्षा, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में लगानी चाहिए। युवा शक्ति ही विकसित भारत की वास्तविक आधारशिला है।
कार्यशैली में युवा जोश, विचारों में दूरदर्शिता
श्री मातवर सिंह कंडारी की विशेषता केवल उनके प्रशासनिक दायित्वों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के साथ सहज संवाद स्थापित करने, सकारात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और सामाजिक सरोकारों से जुड़ने की उनकी सोच भी उन्हें विशिष्ट बनाती है। उनका व्यक्तित्व इस संदेश को रेखांकित करता है कि एक अच्छे अधिकारी की पहचान केवल उसके पद से नहीं, बल्कि उसके दृष्टिकोण, व्यवहार, निर्णयों और समाज के प्रति प्रतिबद्धता से होती है।
उनकी कार्यशैली में सक्रियता, अनुशासन, संवादशीलता और नई पीढ़ी के साथ कदम मिलाकर चलने की भावना जैसे गुण विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। रेशम सहकारिता क्षेत्र में अपने दायित्वों के साथ सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों में सहभागिता उनकी व्यापक कार्यदृष्टि को सामने लाती है।
उनके व्यक्तित्व को समर्पित चंद पंक्तियां—
“जुनून हो युवा-सा, तो हर राह आसान होती है,
सोच में हो दूरदृष्टि, तो हर कोशिश पहचान होती है।
जो अपने कर्मों से जग में सकारात्मकता जगाते हैं,
वही लोग अपने व्यक्तित्व से नई मिसाल बनाते हैं।”
खेलों से नशामुक्त समाज की ओर
चैंपियनशिप में IATR के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए वॉलीबॉल एवं रस्साकशी प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की। वॉलीबॉल में नगेन्द्र, हरीश, सुनील, चंद्रबान, सन्नी, मनोज एवं निकेश की टीम विजेता रही। वहीं रस्साकशी में सुनील लांबा, चंद्रबान, मिन्शु, हिमांशु, सोनू, त्रिलोक, आरती एवं पायल की टीम ने जीत दर्ज की।
IATR के सीईओ श्री अमित उपाध्याय ने कहा कि ‘कहो नशे को ना, खेलो खेल साथ’ जैसे संदेशों के माध्यम से युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और अपनी प्रतिभा को सकारात्मक दिशा देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में IATR की ओर से लतिका राणा, नवीन नौटियाल, रिया एवं सुमन सहित अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।
### प्रेरणा, प्रतिबद्धता और सकारात्मक सोच का संदेश
वैली चैंपियनशिप का समापन केवल खेल प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने युवाओं को अपने भविष्य के प्रति जिम्मेदार बनने और नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा भी दी।
श्री मातवर सिंह कंडारी जैसे युवा सोच और सक्रिय कार्यशैली वाले अधिकारियों की सहभागिता ऐसे आयोजनों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का अवसर प्रदान करती है। उनका संदेश स्पष्ट है—युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा मिले, खेलों को प्रोत्साहन मिले और प्रत्येक युवा स्वस्थ, जागरूक एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाए।



