गुरुकृपा बिना आत्मकल्याण सम्भव नहीं: मुकुन्दानन्द ब्रह्मचारी

चमोली: आषाढ शुक्ल पूर्णिमा की ये पवित्र तिथि सनातनधर्मियों के जीवन की महत्वपूर्ण है। ये भारत गुरुओं का देश है । हमारे जीवन में हर स्तर पर गुरु के मार्गदर्शन की आवश्यकता पड़ती है । सृष्टि के आरम्भ से ही गुरु की अविच्छिन्न परम्परा चलती चली आ रही है । आज गुरुपूर्णिमा के अवसर पर ज्योतिर्मठ परिसर में गुरुव्यास मण्डल में सभी गुरुओं की पूजा की गई भगवान गणेश और शालिग्राम जी की पूजा की गई ।

ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज की गद्दी पर उनके स्वरूप चित्र की पूजा की गई । फिर सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। आचार्य वाणीविलास डिमरी ने सभी अनुष्ठान सम्पन्न कराए ।

आज के इस अवसर पर शङ्कराचार्य महाराज के प्रतिनिधि स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती महाराज ने अपनी शुभकामनाएं और पूज्य महाराजश्री का आशीर्वाद ज्योतिर्मठ के भक्तों के लिए व्यक्त किया । इस अवसर पर व्यास पूजा के अनन्तर स्वामी मृत्युंजय महादेव आश्रम स्वामी जी ने चातुर्मास्य व्रत का संकल्प लिया ।

इस अवसर पर ज्योतिर्मठ के प्रभारी मुकुन्दानन्द ब्रह्मचारी, व्यवस्थापक विष्णुप्रियानन्द ब्रह्मचारी, सर्वभूतात्मानन्द ब्रह्मचारी, कुशलानन्द बहुगुणा , महिमानन्द उनियाल, जगदीश उनियाल, रेखा बिष्ट , प्रेम पंत , मनोज गौतम , दिनेशचन्द्र सती , हरीश डिमरी , अनिल डिमरी , गणेश उनियाल , आशीष उनियाल आदि भक्तगण उपस्थित रहे ।

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