सूचना का अधिकार पारदर्शिता का महत्वपूर्ण आधार : राज्यपाल

देहरादून 07 अक्टूबर। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की 21वीं वर्षगांठ के अवसर पर लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने डॉ. आर एस टोलिया राज्य स्तरीय सूचना का अधिकार अधिनियम वाद-विवाद प्रतियोगिता-2026 के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि सूचना का अधिकार केवल किसी कार्यालय से जानकारी प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह नागरिकों को शासन को समझने, प्रश्न पूछने और व्यवस्था में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि समय के साथ सूचना और शासन के प्रति सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले शासन-प्रशासन में गोपनीयता को अधिक महत्व दिया जाता था, लेकिन आज पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली जितनी अधिक पारदर्शी और जवाबदेह होगी, शासन व्यवस्था उतनी ही प्रभावी और मजबूत होगी। यह केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था का प्रयास नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का सामूहिक दायित्व है। राज्यपाल ने कहा कि 21वीं सदी में तकनीक ने सूचना की पूरी दुनिया को बदल दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, साइबर टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों ने सूचना तक पहुंच को पहले से कहीं अधिक आसान और तेज बना दिया है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए इन तकनीकों का जिम्मेदारी और विवेकपूर्ण उपयोग महत्वपूर्ण है। राज्यपाल ने सूचना आयोग से बदलती तकनीकी परिस्थितियों के अनुरूप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और नई तकनीकों का प्रभावी उपयोग करने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग सूचना तक नागरिकों की पहुंच को और सरल, तेज तथा पारदर्शी बनाने के लिए किया जाना चाहिए। एआई और डिजिटल माध्यमों के उपयोग से आरटीआई से संबंधित जानकारी, मार्गदर्शन और जागरूकता को अधिक व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों में आरटीआई के प्रति जागरूकता बढ़ाने और वहां के नागरिकों की भागीदारी एवं प्रतिनिधित्व को मजबूत करने पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को भी सूचना के अधिकार की पूरी जानकारी और उसके उपयोग के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक और जन-जागरूकता के माध्यम से सूचना आयोग की पहुंच प्रदेश के अंतिम छोर तक बढ़ाई जा सकती है। इस अवसर पर मुख्य सूचना आयुक्त श्रीमती राधा रतूड़ी ने आयोग के क्रिया-कलापों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में सूचना आयुक्त श्री दलीप सिंह कुंवर, पूर्व सूचना आयुक्त योगेश भट्ट, सचिव श्री राजेन्द्र कुमार, सचिव सूचना आयोग श्री रजा अब्बास, अपर सचिव श्रीमती रीना जोशी सहित विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



