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समास और व्यासशैली दोनों के मर्मज्ञ थे भगवान् वेदव्यास शङ्कराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती

 

समास और व्यासशैली दोनों के मर्मज्ञ थे भगवान् वेदव्यास

शङ्कराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती

भगवान् वेदव्यास जी का व्यक्तित्व विशाल रहा है। एक ओर जहाँ उन्होंने ब्रह्मसूत्र का प्रणयन कर अपनी समासशैली अर्थात् संक्षेपीकरण को प्रकट किया वहीं दूसरी ओर अनेक पुराणों की रचना कर अपनी व्यासशैली अर्थात् विस्तारीकरण के गुण को भी लोक कल्याण के लिए प्रकाशित किया। इन दोनों ही कला में वे निष्णात रहे।

उक्त बातें परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘1008’ ने भगवान् वेदव्यास की कथा सुनाते हुए कही।

उन्होंने पाराशर ऋषि से भगवान् वेदव्यास की उत्पत्ति की कथा सुनाते हुए कहा कि महान् लोगों का प्राकट्य भी महान् होता है। सामान्य मनुष्यों को ऐसी कथा सुनकर लौकिक दृष्टि नहीं करनी चाहिए। ज्ञानी लोग पाराशर ऋषि को ब्रह्मविद्या, सत्यवती को ब्रह्माकाराकारित वृत्ति कहते हैं। इनके ही संयोग से व्यास जी का आविर्भाव हुआ।

आगे कहा कि व्यास जी को भगवान् विष्णु का ही रूप कहा गया है। व्यास की इस अलौकिक कथा के श्रवण से पापों से मुक्ति मिलती है।

पूज्यपाद शङ्कराचार्य जी ने व्यासकाशी की कथा सुनाते हुए कहा कि एक बार जब वेदव्यास की परीक्षा लेने के लिए माता अन्नपूर्णा ने उन्हें दो दिन तक भिक्षा नहीं दी तो उन्होंने काशी नगरी को शाप दे दिया और व्यास काशी बसाकर वहाँ पर रहने लगे। फिर भगवान् शिव ने उन्हें समझाया कि काशी में आपकी परीक्षा ली जा रही थी।

आगे शुकदेव जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि व्यास जी को गौरैया द्वारा अपने बच्चों को दाना खिलाने का दृश्य देखकर मोह हो गया और वे सन्तान की कामना के वशीभूत हो गये और अरणि मन्थन के माध्यम से शुकदेव को उत्पन्न किया पर शुकदेव जी भी उत्पन्न होते ही विरक्त हो गये।

पूज्यपाद शङ्कराचार्य जी के प्रवचन के पूर्व—–
प्रमुख रूप से चातुर्मास्य समारोह समिति के अध्यक्ष व निजी सचिव *ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द जी, ज्योतिष्पीठ पण्डित आचार्य रविशंकर द्विवेदी शास्त्री जी, ऋषिकेश संस्कृत विद्यालय के उप प्राचार्य पं राजेन्द्र शास्त्री जी, ब्रह्मचारी निर्विकल्पस्वरूप जी* आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। मंच का संयोजन *श्री अरविन्द मिश्र* एवं संचालन *ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानन्द जी* ने किया।

पंचम दिवस की कथा के यजमान श्री शंकराचार्य बाल विद्या निकेतन झोतेश्वर के कृष्ण कुमार द्विवेदी प्रधान पाठक एवं समस्त शिक्षक रहे जिन्होंने पादुका पूजन भी किया

कार्यक्रम में मुख्य रूप से ज्योतिष पीठ के सीईओ चंद्र प्रकाश उपाध्याय पंडित देवदत्त दुबे अन्नू भैया सुनील शर्मा सोहन तिवारी माधव शर्मा रघुवीर प्रसाद तिवारी रामकुमार तिवारी पंडित आनंद उपाध्याय बद्री चौकसे नर्मदा प्रसाद गुप्ता अरविंद पटेल सत्येंद्र मेहरा हरपाल सिंह राजपूत कपिल नायक सहित बड़ी संख्या में गुरु भक्तों की उपस्थिति रही हैै कार्यक्रमके उपरांत प्रसाद का वितरण किया गया

ज्ञातव्य है कि चातुर्मास्य के अवसर पर पूज्य शङ्कराचार्य जी महाराज का गीता पर प्रवचन प्रातः 7.30 से 8.30 बजे तक भगवती राजराजेश्वरी मन्दिर में होता होता है जिसका प्रसारण 1008.guru इस यू ट्यूब चैनल पर प्रतिदिन होता है।

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