पीसीयू के माध्यम से मिट्टी के पात्र और लकड़ी से निर्मित काष्ठ आवरण में गंगाजल जाएगा देश विदेश

देहरादून: प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के माध्यम से देश और विदेश में गंगाजल उपलब्ध कराए जाने का कार्य संचालित किया जा रहा है। उसी क्रम में उत्तराखंड की मातृशक्ति के समूह द्वारा मिट्टी के पात्रों में तथा आम की लकड़ी से निर्मित काष्ठ  आवरण में गंगा जल को घर घर पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। 

नेचर महिला स्वयं सहायता समूह हरिद्वार ने आज सोमवार को निबंधक सहकारिता कार्यालय  के सभागार में सहकारिता मंत्री डॉ धन सिंह रावत एवं सहकारिता के उच्चाधिकारियों के समक्ष पीसीयू द्वारा गंगा जलि उपहार को प्रस्तुत किया गया। आम की लकड़ी से बने काष्ठ आवरण और मिट्टी के पात्र में अब गंगाजल पहुंचाने का कार्य किया जाएगा। इस अवसर पर सहकारिता मंत्री डॉ धन सिंह रावत द्वारा महिला सहायता समूह और पीसीयू द्वारा संचालित गंगा जली योजना की सराहना की गई।

सहकारिता मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत ने कहा कि यह बहुत अच्छा कांसेप्ट है इसका व्यापक स्तर पर प्रचार और प्रसार करने की आवश्यकता है। उत्तराखंड देव भूमि है यहां हर वर्ष करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं ऐसे में उत्तराखंड अपने आप में अध्यात्मिक टूरिज्म का एक बड़ा डेस्टिनेशन है। 

सहकारिता मंत्री डॉ रावत ने कहा  महिला स्वयं सहायता समूह तथा अन्य स्वयं सहायता समूह द्वारा स्वदेशी निर्मित लोकल फॉर वोकल वस्तुओं को क्रय कर प्रोत्साहित करना चाहिए। जिससे छोटे स्तर पर कार्य करने वाली मातृशक्ति व अन्य समूह को जीविकोपार्जन को मजबूत किया जा सके।

प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के प्रबंध निदेशक मान सिंह सैनी द्वारा बताया गया गंगाजल के साथ श्रद्धालुओं को हरिद्वार में पूजा के दौरान हरि के ऊपर चढ़ाए गए पुष्प से निर्मित धूप भी गंगाजल के साथ ही दी जा रही है। वही पीसीयू द्वारा निर्मित मिट्टी के पात्र में गंगाजल अब 6 महीने तक सुरक्षित अपने वास्तविक गुणवत्ता के साथ स्वच्छ रहता है जबकि प्लास्टिक के डिब्बों में में गंगाजल अपने वास्तविक स्वरूप में नहीं रह पाता। यह गंगाजल अलग-अलग पैकेजिंग में 251, 551, और 1100, के सहयोग राशि के साथ देश और विदेश में उपलब्ध कराया जाएगा।

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