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मंदिर व्यवस्था में पुलिस हस्तक्षेप पर भड़का तीर्थ पुरोहित समाज, बद्रीनाथ में जोरदार विरोध प्रदर्शन

मंदिर व्यवस्था में पुलिस हस्तक्षेप पर भड़का तीर्थ पुरोहित समाज, बद्रीनाथ में जोरदार विरोध प्रदर्शन

बद्रीनाथ, चमोली। श्री बद्रीनाथ धाम में मंदिर परिसर एवं पहुंच द्वारों पर बढ़ते पुलिस हस्तक्षेप को लेकर तीर्थ पंडा-पुरोहित समाज में गहरा आक्रोश देखने को मिला। तीर्थ पुरोहितों एवं हक-हकूकधारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए मंदिर की पारंपरिक व्यवस्थाओं में अनावश्यक हस्तक्षेप का विरोध किया।

 

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मंदिर परिसर तथा उसके पहुंच मार्गों पर पुलिस का अनावश्यक हस्तक्षेप किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका आरोप है कि इस प्रकार की गतिविधियां सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं एवं मंदिर की स्थापित व्यवस्थाओं को प्रभावित कर रही हैं।

 

उल्लेखनीय है कि मंदिर की पूजा-अर्चना एवं भोग व्यवस्था के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पुजारी समुदाय की शीर्ष संस्था श्री बद्रीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत ने भी इस विषय को गंभीरता से उठाया है। पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने मंदिर परिसर एवं पहुंच द्वारों पर बढ़ते पुलिस हस्तक्षेप पर कड़ी आपत्ति जताते हुए बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, पुलिस महानिदेशक, गढ़वाल मंडल आयुक्त, जिलाधिकारी चमोली एवं पुलिस अधीक्षक चमोली को पत्र प्रेषित कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

 

अपने पत्र में आशुतोष डिमरी ने कहा है कि मंदिर परिसर की व्यवस्थाएं बीकेटीसी के अधिकार क्षेत्र में आती हैं तथा डिमरी पुजारी समुदाय, तीर्थ पुरोहितों एवं अन्य हक-हकूकधारियों के आपसी समन्वय और सहयोग से संचालित होती रही हैं। उन्होंने धार्मिक परंपराओं और मंदिर की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रशासन से संवेदनशीलता बरतने की अपील की है।

इस बीच बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने भी मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में एक शिकायती पत्र प्राप्त हुआ है। द्विवेदी के अनुसार पुलिस प्रशासन का दायित्व कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं में अनावश्यक हस्तक्षेप उचित नहीं है।उन्होंने बताया कि इस संबंध में मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं तथा पुलिस प्रशासन से भी अपेक्षा की गई है कि वह केवल कानून एवं व्यवस्था से जुड़े विषयों तक अपनी भूमिका सीमित रखे और मंदिर की पारंपरिक व्यवस्थाओं में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचे।

मामले को लेकर तीर्थ पुरोहित समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में व्यापक आंदोलन की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

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