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पारंपरिक रीति रिवाज व पौराणिक मान्यताओं से परिपूर्ण है डिम्मर की रामलीला …..

आशुतोष डिमरी
डिम्मर (चमोली)। उत्तराखंड की प्राचीन रामलीला में शुमार होने वाली ग्राम डिम्मर की रामलीला अपने 103 में बसंत में इन दिनों बड़े भव्य तरीके से चल रही है। बद्रीनाथ धाम के पुजारी समुदाय डिमरियों के मूल ग्राम चमोली के डिम्मर गांव में रामलीला प्रारंभ करने का बहुत पुराना इतिहास है। रामलीला का आयोजन भी सामान्य तौर पर पूरे भारत में आयोजित होने वाली रामलीला से अलग हटकर है। विशिष्ट पूजा अर्चना के साथ डिम्मर की रामलीला पारंपरिक रीति रिवाज व पौराणिक मान्यताओं से परिपूर्ण है। 24 मार्च से शुरू हुई इस रामलीला के आज सातवें दिवस में श्री राम के परम भक्त श्री हनुमान जी के दर्शन की दिव्य झांकी के दर्शनार्थ भारी संख्या में लोगों ने डिम्मर गांव पहुंचकर भगवान श्रीराम व श्री हनुमान के दर्शन का पुण्य लाभ अर्जित किया। यहां इस बात का उल्लेख करना भी जरूरी है कि डिमर गांव में प्रतिवर्ष श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले भगवान श्री विष्णु की पूजा के निमित्त श्री राम की पूजा अर्चना के लिए रामायण पाठ व रामलीला का पूजन मंचन का आयोजन प्राचीन काल से चला आ रहा है। रामलीला के ईस्ट पूजन व नाट्य मंचन में रामलीला मंडली के अध्यक्ष संजय डिमरी प्रभुकांत, मंत्री रविंद्र खंडूरी, कोषाध्यक्ष मुकेश डिमरी , उपाध्यक्ष सुबोध डिमरी,बुजुर्ग मोहन प्रसाद डिमरी, उमा प्रसाद डिमरी , हृदय भूषण डिमरी के साथ आचार्य गणेश खंडूरी, आचार्य विजय राम डिमरी, आचार्य सत्य प्रसाद खंडूरी, प्रमवेन्द्र प्रसाद डिमरी,हर्ष बर्धन डिमरी,गोपी डिमरी, सुरेश डिमरी, प्रकाश डिमरी, अशोक डिमरी,शरद डिमरी, संजय डिमरी,डॉ सुनील डिमरी,शोभित समेत महिला मंगल दल युवक मंगल दल आदि बढचढ़ कर अपना योगदान दे रहे हैं। हारमोनियम पर अमित खंडूरी व तबले पर शिवांग डिमरी रामलीला में संगत दे रहे हैं। जबकि रामलीला में मशहूर कलाकार के रूप में रावण के पात्र सुशील खण्डूड़ी, केकई के पात्र सुशील डिमरी,स्त्री पात्र प्रदीप डिमरी , केवट के पात्र पुनीत डिमरी,दशरथ के पात्र शैलेन्द्र डिमरी, लक्ष्मण के पात्र बालाजी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने हैं।

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