हिमाचल के तर्ज पर उत्तराखंड में भी मनरेगा कार्मिकों को नियमित करने की मांग ने पकड़ा अब जोर…

उत्तराखंड में मनरेगा के अंतर्गत दूरस्थ इलाकों में काम कर रहे कार्मिकों के नियमितीकरण व विभागीय समायोजन की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। मनरेगा कर्मचारी संगठन इन दिनों देहरादून में नियमितीकरण व समायोजन को लेकर धरने पर बैठा हुआ है। महात्मा गांधी कर्मचारी संगठन उत्तराखंड ने मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को ज्ञापन सौंपकर मनरेगा के तहत काम कर रहे कार्मिकों को हिमाचल की तर्ज पर नियमितीकरण व विभागीय संयोजन की मांग की है। ज्ञापन सौंपने वालों में मनरेगा कर्मचारी संगठन के संरक्षक द्वारिका देवली, अध्यक्ष सुंदरमणी सेमवाल, संयोजक विक्रम सिंह, महामंत्री सुबोध उनियाल, प्रदेश प्रवक्ता रमेश गड़िया, मुकेश डिमरी, विमल राणा, नीरज पडियार, दीपेंद्र रावत, अजय मिश्रा, महादेव प्रसाद, यशपाल आर्य, समीम बैग, हितेंद्र बलदिया, मोहन सती, विशाल मित्तल, सौरभ श्रीवास्तव, संदीप डिमरी आदि शामिल थे उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही मनरेगा कार्मिकों को अपने नियमितीकरण व विभागीय समायोजन की आश जगने लगी है। विगत 15 वर्षों से उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के लिए मनरेगा के तहत कार्यरत कार्मिक विपरीत परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। अल्प मानदेय में कार्मिक दूरस्थ इलाकों में विकास योजनाओं को हर गांव तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उत्तराखंड में मनरेगा के तहत काम कर रहे करीब डेढ़ हजार कार्मिक शामिल है। सरकार की विकास योजनाओं के साथ ही मनरेगा कार्मिक सरकार से जुड़े हुए तमाम कार्यों में भी योगदान दे रहे हैं चुनाव में ड्यूटी से लेकर अन्य सरकारी कामों में मनरेगा कार्मिकों की भागीदारी है लेकिन लंबे समय से अल्प मानदेय मैं काम करने के चलते मनरेगा कार्मिकों के सामने आर्थिक संकट घर आया हुआ है इस बीच मनरेगा कर्मचारी संगठन के पक्ष में उत्तराखंड के कई विधायकों ने इन कार्मिकों को नियमित व विभाग में समायोजन करने की पैरोकारी की है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कर्मचारी संगठन को सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया है। गौरतलब है कि गढ़वाल सांसद रहते हुए रावत पूर्व में मनरेगा कार्मिकों की दिक्कतों को देखते हुए कार्मिकों की मांग को जायज बता चुके हैं।

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