*उत्तराखंड रैबार कार्यक्रम में डोभाल,त्रिवेंद्र और डिमरी की गूंज, बदलते परिवेश में भी अपनी जड़ों से जुड़ा रहना जरूरी*


जन आगाज डेस्क
नई दिल्ली/देहरादून। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा रैबार एक संदेश का माध्यम है और भावपूर्ण होना उसकी आत्मा है। इस संदर्भ में उन्होंने उत्तराखंड देशवासियों को एक कॉल किया कि आज जरूरत है कि हम अपने व्यवहार में संदेशों के माध्यम से कम्युनिकेशन में आत्मीयता और भावनात्मकता को वापस लाएं। डोभाल का कहना था कि इस बदलते परिवेश में हम सबको बदलना है लेकिन हम कुछ इस तरह से बदलें कि हम परिवेश में तो बदलें लेकिन अपनी पहाड़ी देवभूमि की जो हमारी आइडेंटिटी है उसको ना बदलते हुए इसको बदले तो एक तरह से हम बदले और एक तरह से हम अपनी जड़ों से जुड़े रहे ।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद त्रिवेंद्र रावत का कहना था कि देवभूमि उत्तराखंड हिमालय अनादि काल से पूरे विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। जिस हिमालय में चार वेद और 18 पुराण का निर्माण हुआ है हम लोग वहां के निवासी हैं।
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि विकसित भारत के तहत 2047 तक इस योजना में भारत में उत्तराखंड जैसे राज्य की भागीदारी बड़े पैमाने पर सुनिश्चित होनी चाहिए।
भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी एम्बेसडर आलोक अमिताभ डिमरी ने कहा कि हमें उत्तराखंड के समग्र विकास के लिए स्वास्थ्य एवं गुणवत्ता परक शिक्षा पर जोर देते हुए अपनी जड़ों से जुड़े रहना जरूरी है।
कार्यक्रम में गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी, उत्तराखंड के स्वास्थ्य व शिक्षा मंत्रीडॉ० धन सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, वरिष्ठ पत्रकार मनजीत नेगी उत्तराखंड के विशिष्ट व्यक्तियों ने अपने विचार प्रकट करते हुए प्रतिभाग किया।



