बीजेपी के इंटरनल सर्वे में 32 विधानसभा में से सूबे के मुखिया की चंपावत भी शामिल…


जन आगाज डेस्क
देहरादून। बीजेपी के इंटरनल सर्वे के मुताबिक उत्तराखंड में 47 विधानसभा सीट में से भाजपा के 32 विधायकों के टिकट पर तलवार की खबर अपने आप में बहुत कुछ कह रही है। कांग्रेस के मुताबिक सरकार के मुखिया यानी सीएम पुष्कर सिंह धामी की चंपावत की विधानसभा भी 32 में शामिल है। यहां इस बात का उल्लेख करना जरूरी है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में सीएम की कुर्सी पर होते हुए भी पुष्कर सिंह धामी खटीमा सीट से 6 000 से भी अधिक वोटो के अंतर से कांग्रेस से हार गए थे, हालांकि सीएम पद की शपथ लेने के बाद चंपावत की सीट पर हुए उपचुनाव से धामी का विधानसभा का मार्ग प्रशस्त हुआ था।

उत्तराखंड के दूरस्थ गांवों से लेकर शहरों और देहरादून तक राजनीतिक गलियारों में इन दिनों यह मुद्दा खासी चर्चा का विषय बना हुआ है।
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी का कहना है कि अगर सरकार और विधायकों का काम इतना अच्छा है, तो भाजपा को अपने ही विधायकों के खिलाफ आंतरिक सर्वे कराने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
दसौनी ने कहा कि भाजपा आज “जीत की गारंटी वाले चेहरों” की तलाश में है, क्योंकि उसे अपने मौजूदा विधायकों के खिलाफ जनता की नाराजगी दिखाई दे रही है, पर सवाल यह है कि 32 विधायक अचानक खराब कैसे हो गए? पांच साल तक भाजपा ने इन्हीं विधायकों को विकास का चेहरा बताया, अब चुनाव नजदीक आते ही इनसे किनारा करने की तैयारी क्यों?
गरिमा के अनुसार असल में यह 32 विधायकों का संकट नहीं, भाजपा सरकार के पांच साल के कामकाज पर जनता के भरोसे का संकट है। यहां तक की मुखिया का सिंहासन भी 32 में गिना जा रहा है, और उनके लिए भी पूरा संगठन सुरक्षित सीट खोज रही है ऐसा बताया जा रहा है ।
गरिमा ने कहा भाजपा कितने भी चेहरे बदल ले, जनता महंगाई, बेरोजगारी, भर्ती घोटालों, कानून-व्यवस्था, पलायन और भ्रष्टाचार जैसे सवालों को नहीं भूलेगी। चेहरा बदलने से सरकार की जवाबदेही नहीं बदल जाती।
अगर भाजपा सिर्फ “एंटी-इनकंबेंसी मैनेज” करने के लिए विधायकों के टिकट काटती है, तो यह स्वीकार करना होगा कि उसे अपने ही शासन के खिलाफ जनता के गुस्से का अंदाजा हो चुका है।
भाजपा के 32 विधायकों के टिकट पर तलवार नहीं लटकी है, दरअसल भाजपा के पांच साल के कामकाज पर जनता की नाराजगी की तलवार लटक रही है।गरिमा ने कहा कि
हमें भाजपा के टिकट कटने की खुशी नहीं, जनता के मुद्दों की चिंता है। भाजपा चेहरे बदलेगी, लेकिन उत्तराखंड की जनता अब सरकार बदलने का मन बना चुकी है। दूसरी ओर इस मसले को लेकर अभी तक भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
मौजूदा हालात के तहत दिल्ली जंतर मंतर समेत देश के कई राज्यों में पेपर लीक के साथ ही अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी जैसे गंभीर मुद्दों पर जैन जी व पूरे विपक्ष से घिरी केंद्र सरकार वह भाजपा संगठन के लिए एक बड़ी चुनौती सामने खड़ी दिखाई दे रही है।



