
कर्णप्रयाग नौटी:
भगवान शिव के माहात्म्य को कहने वाले श्रीशिव महापुराण का आयोजन कर्णप्रयाग के नौटी गांव में महाकाल गिरी जी और गांव वालों के सौजन्य से सम्पन्न हो रहा है । आज इस ज्ञानयज्ञ में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती जी महाराज के शिष्य ज्योतिर्मठ के प्रभारी मुकुन्दानन्द ब्रह्मचारी सम्मिलित हुए और उपस्थित जनसमूह को धर्मोपदेश किया ।
आज के कथा प्रवचन में कथा के ब्यास जी व विशेष रूप से श्रीमद् शिव महापुराण में पहुंचे ज्योतिष पीठ के ब्रह्मचारी मुकुंदानंद ने भगवान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए धर्म वह सनातन परंपरा के मार्ग की व्याख्या की। मुकुंद आनंद ब्रह्मचारी ने प्रवचन के दौरान कहा कि आज से 2500 वर्ष पूर्व हमारे आदि जगतगुरु शंकराचार्य ने जिस ज्ञानमार्ग को हमें दिखाया है वही सनातन धर्म का मार्ग हमें ईश्वर तक ले जाने की प्रेरणा प्रदान करता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि सोमवार के दिन चंद्र देव शिव का पूजन किया करते थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें निरोगी और सुंदर काया का आशीर्वाद दिया। चंद्र देव शिवजी के माथे पर भी विराजमान हैं।
शिव पुराण का पाठ करते समय बरतें ये सावधानियां
शिव पुराण को पढ़ने या सुनने से पूर्व तन और मन को शुद्ध करें।
नए अथवा साफ और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
मन में भगवान शिव के प्रति श्रद्धा रखें।
किसी के प्रति द्वेष भाव न रखें।
किसी की निंदा, चुगली न करें अन्यथा पुण्य समाप्त हो जाते हैं।
सात्विक भोजन ग्रहण करें और तामसिक पदार्थों का त्याग करें।
किसी भी तरह का पाप न करें।
शिव पुराण का पाठ सुनने से पहले या बाद में किसी का दिल न दुखाएं।
शिव पुराण का पाठ करने या सुनने के लाभ
शैव मत संप्रदाय के लिए यह पवित्र ग्रंथ है। इस धार्मिक ग्रंथ में शिव महिमा का वर्णन है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिव पुराण का पाठ करने से मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं, निःसंतान लोगों को संतान की प्राप्ति हो जाती है। अगर वैवाहिक जीवन से संबंधित समस्याएं आ रही हैं तो वे समस्याएं दूर हो जाती हैं। व्यक्ति के समस्त प्रकार के कष्ट और पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन के अंत में उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इस अवसर पर बदरीनाथ केदारनाथ मन्दिर समिति सदस्य आशुतोष डिमरी , आयोजन समिति के महत्वपूर्ण सदस्य अरुण मैठाणी , प्रवीण नौटियाल , आशीष उनियाल , वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश डिमरी, क्षेत्र पंचायत सदस्य संदीप डिमरी, देहरादून के प्रतिष्ठित सर्जन डॉ० माधव प्रसाद मैठाणी, कौस्तवमणि नौटियाल आदि मौजूद थे।